मर्मों का परिमाप
ऊर्वी , कूर्चशिर , विपट , कक्षधर , प्रश्व , सन्धि और स्तनमूल नामक मर्म , प्रत्येक का परिमाण एक – एक अंगुल हैं | मणिबंध और गुल्फ नामक मर्मों का परिमाप दो-दो अंगुल है | कूर्पर और जानु मर्म तीन-तीन अंगुल परिमाण वाले हैं | ह्रदय , वस्ति , कूर्च , गुद , नाभि और शिर के चार श्रृंगाटक , पाँच सीमन्त तथा गले के दस मर्म और दो मर्म अर्थात बारह मर्म ये सब मुष्टि प्रमाण वाले हैं | शेष मर्मों को आधा अंगुल परिमाप वाला जानना चाहिए |
अष्टांग संग्रहकार के अनुसार परिमाप भेद से मर्मों के पाँच प्रकार हैं- यथा- उर्वी (चार), चार कूर्च शिर , दो विटप और दो कक्षाधर ये बारह मर्म प्रत्येक मनुष्य की अपनी अंगुली के परिमाप के बराबर हैं | दो गुल्फ , दो मणिबंध और दो स्तनमूल – ये छः मर्म , दो अंगुल परिमाप के होते हैं | दो जानु और दो कुर्पर चार अंगुल परिमाप के होते हैं | चार कूर्च, एक गूदा, एक बस्ति , एक नाभि और एक ह्रदय ये चार , दो नीला , दो मन्या , आठ मातृका , पांच सीमन्त , चार श्रृंगाटक ये उन्नतीस मर्म हाथ की हथेली (मुष्ठि) के बराबर होते हैं | शेष छप्पन मर्म अपनी आधी अंगुल के बराबर होते हैं |
अन्य आचार्यों के मन में चार क्षिप्र मर्म ब्रिहि (जौ) के बराबर होते हैं | दो स्तनरोहित एवं दो उत्क्षेप ये चार मर्म मटर के बराबर और अन्य समस्त मर्म तिल के प्रमाण सदृश होते हैं |