मर्म विज्ञान का परिचय

मनुष्य शरीर को धर्म, अर्थ, काम ओर मोक्ष का आधार माना गया है | इस मनुष्य शरीर से समस्त लोकिक एवं परलऔकिक उपलब्धियों / सिद्धियों को पाया जा सकता है |                               वही ‘शरीर व्याधि मंदिरम’ भी कहा है | क्या रोगी एवं अवस्था शरीर से इन चारों फलों की प्राप्ति संभव है ? क्या धर्म , अर्थ , काम , मोक्ष की प्राप्ति के साधन इस शरीर को स्वस्थ रखने एवं इसको माध्यम बनाकर अनेक सिद्धियों को प्राप्त करने का कोई उपाय है ? इस प्रशन के उत्तर में मर्म विधा का नाम लिया जा सकता है | 

वास्तव में मानव शरीर आरोग्य का मंदिर एवं साहस, शक्ति, उत्साह का समुद्र है , क्योंकि इस मनुष्य शरीर में परमात्मा का वास् है | स्कन्द पुराण के अनुसार मनुष्य की नाभि में ब्रह्मा , ह्रदय में श्रीविष्णु एवं चक्रों में श्रीसदाशिव का निवास स्थान है | ब्रह्मा वायुतत्व , रूद्र अग्नितत्व एवं विष्णु सोम्तत्व के बोधक हैं | यह विचारणीय विषय है कि  परमात्मा का वास् होने पर यह शरीर रोगी कैसे हो सकता है? यदि हम इस प्रशन पर गंभीरता से विचार करें तो हमें इन समस्त समस्याओं का समाधान इसी शरीर में प्राप्त हो जाता है | योग, प्राणायाम एवं मर्म चिकित्सा के माध्यम से शरीर को स्वस्थ कर आयु और आरोग्यसंवर्धन के संकल्प को पूरा किया जा सकता है |

Scroll to Top